अनादि काल से संपूर्ण भारतवर्ष एवम विश्व में भारतीय मनीशियो का प्रादुर्भाव रहा है सभी ने इस देव भूमि पर अवतरित प्रभु श्री राम एवम् कृष्ण का वंदन किया है , प्रभु श्री राम मानवीय गुणों एवम् मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप मे जन जन में विद्यमान थे
समय का चक्र तेज़ी से बदलता रहा , जो राष्ट्र कभी भारतवर्ष को गौरवशाली एवम संतों की भूमि के रूप में प्रणाम करते थे आज समय के साथ बदल गये या दुनिया की नज़रों मे विकसित हो गये , पर हमने स्वयं को किस विकास के लिए बदल दिया ?
क्या अपनी धरती अपने प्रभु को भुलाकर कोई इंसान आत्मसम्मान से जीवित रह सकता है....? शायद नहीं ... भारतीयता एक जीवन जीने की कला है जिसे इस धरती पर अवतरित महापुरुषों ने सम्रद्ध किया है
आज के समय मे इस राष्ट्र की सार्थकता तभी सिद्ध हो सकती है जब हम ईश्वरीय आदेशों का धर्मनुसार पालन करें, पुन: जन जन में प्रभु द्वारा
समय का चक्र तेज़ी से बदलता रहा , जो राष्ट्र कभी भारतवर्ष को गौरवशाली एवम संतों की भूमि के रूप में प्रणाम करते थे आज समय के साथ बदल गये या दुनिया की नज़रों मे विकसित हो गये , पर हमने स्वयं को किस विकास के लिए बदल दिया ?
क्या अपनी धरती अपने प्रभु को भुलाकर कोई इंसान आत्मसम्मान से जीवित रह सकता है....? शायद नहीं ... भारतीयता एक जीवन जीने की कला है जिसे इस धरती पर अवतरित महापुरुषों ने सम्रद्ध किया है
आज के समय मे इस राष्ट्र की सार्थकता तभी सिद्ध हो सकती है जब हम ईश्वरीय आदेशों का धर्मनुसार पालन करें, पुन: जन जन में प्रभु द्वारा

हाल में श्रीनगर में आयोजित एक रैली में जिसमें मुख्यमंत्री उपस्थित थे, वन्दे मातरम के गान पर जो विवाद उठा उस पर किसी को भी लज्जा हो सकती है। मुफ्ती वशीरूद्दीन अहमद ने दावा किया कि वन्देमातरम हमारा राष्ट्रगीत नहीं हो सकता क्योंकि यह इस्लाम की मूल धारणा के विरूध्द हैं और इसने जम्मू-कश्मीर के लोगों की भावनाओं पर आघात पहुंचाया है। हुरियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष मीरवायज़ उमर फारूख ने इस घटना की भर्त्सना की और कहा कि बच्चों से धर्म-विरोधी गीत-गवाना भारत सरकार द्वारा उनकी धार्मिक पहचान मिटाने की दूरगामी साजिश है। समारोह में हजारों बच्चों की उपस्थित में वंदेमातरम गाया गया था। उन्हीं सारे तर्कों को कश्मीर में दोहराया गया जो देश के अनेक मुस्लिम नेता पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय गौरव के इस गान पर आपत्ति के रूप में बड़बोलेपन द्वारा व्यक्त करते रहे हैं।