Wednesday, 7 December 2011

क्या आप किसी ऐसे राजनेता को जानते हैं जिसनें अपनी औलादों को सेना में भरती होनें के लियॆ प्रेरित किया हो ?

आज भी हर चौथा भारतीय भूखा सोता है


जब भारत विश्व शक्ति बनकर उभरने का दावा कर रहा है,ऐसे समय देश में हर चौथा व्यक्ति भूखा है. भारत में भूख और अनाज की उपलब्धता पर भारत के एक ग़ैर-सरकारी संगठन की ताज़ा रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया है.
यह आंकड़े नवदान्य ट्रस्ट द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट का हिस्सा हैं जिसमें कहा गया है कि 'बढ़ती महंगाई और सरकारों द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली में हाल के दिनों में फैलाई गई अव्यवस्था ने स्थिति को और भी बदतर कर दिया है.'
ग़ैर-सरकारी संगठन की रिपोर्ट के अनुसार देश में तकरीबन 21 करोड़ से अधिक जनसँख्या को भर पेट भोजन नहीं मिल पाता है. संख्या के अनुपात में यह अफ़्रीका के सबसे गरीब देशों से भी ज़्यादा है.
'भूख के कारण' नाम की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि क्षेत्र में खाद्य सामग्री के वितरण में निजी कंपनियों के बढ़ते दख़ल ने खाने पीने की चीजों की कीमतें बढ़ा दी हैं.
उदारीकरण के बाद से सरकार ने 'सही ज़रूरतमंदों को ही छूट' के नाम पर सिर्फ़ बहुत गरीब वर्गों को ही सार्वजानिक वितरण प्रणाली के तहत सस्ते अनाज देने की सुविधा जारी रखी है.

पहले सस्ते दामों पर खाने पीने के सामान की सुविधा सभी नागरिकों को थी. अब यह सुविधा जनसँख्या के सिर्फ़ एक छोटे वर्ग को हो मिल रही है. एक अनुमान के मुताबिक गरीबों में भी ये सुविधा केवल 10 प्रतिशत लोगों को ही उपलब्ध है.
ट्रस्ट की प्रमुख वंदना शिवा के अनुसार "भले ही सत्ताधारी वर्ग और देश का एक वर्ग जीडीपी यानी सकल घरेलु उत्पाद को बढ़ाने को ही सबसे अहम काम समझ रहा है पर सच तो यह है कि एक आम आदमी को प्रति वर्ष मिलने वाली खाद्य सामग्री पिछले 10 बरसों के भीतर 34 किलो कम हो गई है."

उनके अनुसार वर्ष 2009 के आसपास भारत में खाद्य सामग्री की प्रति व्यक्ति सालाना खपत 186 किलोग्राम थी जो साल 2010 तक 152 किलोग्राम जा पहुँची.

भारत में आर्थिक उदारीकरण का काम 90 के दशक में शुरु हुआ था. तब केंद्र में कांग्रेस पार्टी की नरसिंह राव सरकार थी. पिछले पांच बरसों में रिपोर्ट के अनुसार गरीबों को मिलने वाली खाद्य सामग्री में भारी कमी आई है.
'भूख के कारण'

ट्रस्ट के अनुसार खाद्य पदार्थों की बढ़ी कीमतों की सच्चाई को छिपाने के लिए सरकार ने खाद्य पदार्थों को स्टील और धातुओं की कीमतों के आकलन वाले वर्ग में डाल दिया है, जिनकी कीमतें पिछले दिनों तेज़ी से गिरी हैं. इस तरह खाने पीने की वस्तुओं की थोक कीमतें में गिरावट तो देखी गई है लेकिन असल में खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ी हैं.

सालाना महंगाई जिस फ़ार्मूले से आंकी जाती हैं उसमें ज़रुरत के सामानों के अलग अलग वर्ग तैयार किए गए हैं जिसमें हाल की कीमतों की तुलना के आधार पर एक महँगाई दर आँकी जाती है.

इससे खाने पीने की वस्तुओं पर सरकार द्वारा दी जाने वाली छूट यानी सब्सिडी में भी इज़ाफ़ा हुआ है. आर्थिक उदारीकरण के पहले दी जाने वाली सब्सिडी 2450 करोड़ रुपए थी जो पिछले वित्तीय वर्ष में बढ़कर 32667 करोड़ रुपए हो गई है. कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा है कि अगले साल खाद्य सामग्री पर दी जाने वाली कुल छूट 50,000 करोड़ रूपए हो जाएगी.

वंदना शिवा कहती हैं, "हम अपने लोगों को भूखा रखने के लिए ज़्यादा पैसा ख़र्च कर रहे हैं."

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को हर एक नागरिक के लिए सार्वजानिक वितरण प्रणाली की व्यवस्था करनी होगी जिसका नियंत्रण स्थानीय स्तर पर किया जाए. साथ ही एक ऐसी कृषि व्यवस्था को दोबारा बढ़ावा देना होगा जहाँ केवल 'कैश क्रौप पर ज़ोर न होकर पहले की तरह हर तरह के अनाज उपजाने को बढ़ावा दिया.
रिपोर्ट का दावा है कि हाल के बरसों में अनाज उगाने वाली 80 लाख हेक्टेअर भूमि पर एक्सपोर्ट की जाने वाले सामग्री उगानी शुरू कर दी गई है जबकि एक करोड़ हेक्टेअर से ज़्यादा ऐसी ज़मीन पर जैविक ईधन पैदा करने वाले पेड़ लगा दिए गए हैं.
रिपोर्ट के अनुसार विशेष आर्थिक क्षेत्रों के लिए ली जाने वाली ज़मीनों से कृषि क्षेत्र पर दबाव और बढ़ेगा.

राजनेता


क्या आप किसी ऐसे राजनेता को जानते हैं जिसनें अपनी औलादों को सेना में भरती होनें के लियॆ प्रेरित किया हो ?

अब वो कौन है जो SC ST OBC Backward कोटे में हिन्दु मुसलमान दोनो को छिन्न भिन्न कर रहे है?

 


विभाजन और उसके तहत मौते "गदर" जिम्मेदार हिन्दु और मुसलमान खुद रहे हैं!

रही बात जिन्ना की जो उन्हों ने जो किया सही-गलत ये कथित सेकुलर ढोंग से बाहर आ कर वास्तविक परिपेक्ष को देखते हुए बात करने का विषय है!

जिन्ना की औकात कभी निर्णायक की नही थी प्रथम दोष उनका है ("चाहे जिस कारण हो") जिन्होंने सहमती दी और निर्णय घोषित किया!

खैर वो रही बीती बात...अब जिसे भाये वो लकीर पीटे!

मै निवेदन कर पूछता हूँ आप सब गणमान्य जनों से कि आज वो कौन सा राजनेता है जिसका जिन्न जिन्ना से बडा नही है?

जिन्ना ने हिन्दु और मुसलमान में बाँटा "ठीक है" तो अब वो कौन है जो SC ST OBC Backward कोटे में हिन्दु मुसलमान दोनो को छिन्न भिन्न कर रहे है? कह दीजिये उनका जिन्न जिन्ना से छोटा है!!!

श्री दुर्गा चालीसा

 

श्री दुर्गा चालीसा



नमो नमो दुर्गे सुख करनी । नमो नमो अम्बे दुःख हरनी ।।

निराकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूं लोक फैली उजियारी ।।

शशि ललाट मुख महा विशाला । नेत्र लाल भृकुटी विकराला ।।

रुप मातु को अधिक सुहावे । दरश करत जन अति सुख पावे ।।

तुम संसार शक्ति लय कीना । पालन हेतु अन्न धन दीना ।।

अन्नपूर्णा हुई जग पाला । तुम ही आदि सुन्दरी बाला ।।

प्रलयकाल सब नाशन हारी । तुम गौरी शिव शंकर प्यारी ।।

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें । ब्रहृ विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ।।

रुप सरस्वती को तुम धारा । दे सुबुद्घि ऋषि मुनिन उबारा ।।

धरा रुप नरसिंह को अम्बा । प्रगट भई फाड़कर खम्बा ।।

रक्षा कर प्रहलाद बचायो । हिरणाकुश को स्वर्ग पठायो ।।

लक्ष्मी रुप धरो जग माही । श्री नारायण अंग समाही ।।

क्षीरसिन्धु में करत विलासा । दयासिन्धु दीजै मन आसा ।।

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी । महिमा अमित न जात बखानी ।।

मातंगी धूमावति माता । भुवनेश्वरि बगला सुखदाता ।।

श्री भैरव तारा जग तारिणि । छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ।।

केहरि वाहन सोह भवानी । लांगुर वीर चलत अगवानी ।।

कर में खप्पर खड्ग विराजे । जाको देख काल डर भाजे ।।

सोहे अस्त्र और तिरशूला । जाते उठत शत्रु हिय शूला ।।

नगर कोटि में तुम्ही विराजत । तिहूं लोक में डंका बाजत ।।

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे । रक्तबीज शंखन संहारे ।।

महिषासुर नृप अति अभिमानी । जेहि अघ भार मही अकुलानी ।।

रुप कराल कालिका धारा । सेन सहित तुम तिहि संहारा ।।

परी गाढ़ सन्तन पर जब जब । भई सहाय मातु तुम तब तब ।।

अमरपुरी अरु बासव लोका । तब महिमा सब रहें अशोका ।।

ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी । तुम्हें सदा पूजें नर नारी ।।

प्रेम भक्ति से जो यश गावै । दुःख दारिद्र निकट नहिं आवे ।।

ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई । जन्म-मरण ताको छुटि जाई ।।

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी । योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ।।

शंकर आचारज तप कीनो । काम अरु क्रोध जीति सब लीनो ।।

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को । काहू काल नहिं सुमिरो तुमको ।।

शक्ति रुप को मरम न पायो । शक्ति गई तब मन पछतायो ।।

शरणागत हुई कीर्ति बखानी । जय जय जय जगदम्ब भवानी ।।

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा । दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा ।।

मोको मातु कष्ट अति घेरो । तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ।।

आशा तृष्णा निपट सतवे । मोह मदादिक सब विनशावै ।।

शत्रु नाश कीजै महारानी । सुमिरों इकचित तुम्हें भवानी ।।

करौ कृपा हे मातु दयाला । ऋद्घि सिद्घि दे करहु निहाला ।।

जब लगि जियौं दया फल पाऊँ । तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ ।।

दुर्गा चालीसा जो नित गावै । सब सुख भोग परम पद पावै ।।

देवीदास शरण निज जानी । करहु कृपा जगदम्ब भवानी ।।

सबको सम्मति दे भगवान् भैया यु ही श्रीमद भागवत में श्री कृष्ण ने नहीं कहा है की "संघे शक्ति कल्युगे" !!! हम कब बोले इस देश पर मुसलमानों का हक़ नहीं है ? हम कब बोले की मुसलमान ने देश के लिए बलिदान नहीं दिया ? हम कब बोले सारे मुसलमान आतंकवादी है ? हम कब बोले सारे मुसलमान देश के दुश्मन है ? हम कब बोले की भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करो और मुसलमानों को बाहर भगा दो ?

"उसने कहा था" पर किसने कहा ???


समर शेष है ,नहीं पाप का भागी केवल व्याध
जो तटस्थ है, समय लिखेगा उनके भी अपराध !!!



जय हिंद !!!
ये किसकी ऊँगली है,जो ऊँगली कर रहा है ?

"उसने कहा था" 
तो भैया यु ही श्रीमद भागवत में श्री कृष्ण ने नहीं कहा है की "संघे शक्ति कल्युगे" !!! 
हम कब बोले इस देश पर मुसलमानों का हक़ नहीं है ?
हम कब बोले की मुसलमान ने देश के लिए बलिदान नहीं दिया ?
हम कब बोले सारे मुसलमान आतंकवादी है ?
हम कब बोले सारे मुसलमान देश के दुश्मन है ?
हम कब बोले की भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करो और मुसलमानों को बाहर भगा दो ?

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* हमने कहा कश्मीर पर कश्मीरी पंडितो का भी हक़ है उसे दिलाने के लिए आगे आओ ! !
* हमने कहा जो मुसलमान आतंकवाद का साथ दे रहे है कौम उन्हें चिन्हित करे !
* हम कहते है मज़हब के नाम पर कतल करने वाले कातिलो को पकड़वाओ ,उनका साथ मत दो !
* हम कहते है दुश्मन के देश से अमन की आशा मत करो, ये उसकी फितरत नहीं है !
* हमने कहा उलेमाओं से जेहाद के नाम पर दहशत फैलाने वाले दहशतगर्दो पर फतवा जारी करे,की ऐसा करने वालो को क़यामत के दिन दोज़ख की आग नसीब होगी !
* हमने कहा बता दो कौम के नाम पर नफरत फैलाने वालो को की इस्लाम उनकी बपौती नहीं है, उनका जेहाद "जेहाद" नहीं है, और अमन चाहने वाली इस्लामी कौम कतई उनके साथ नहीं है !

तो भैया ज़रा ये बता दो की हमने ऐसा क्या , कहाँ और कब कहा जिससे हम दंगा करवा दंगाई बने ???
अब फिरभी इसपर कोई दंगा करने आये तो "करे" !!!!
रामायण काल में जिन्हें असुर कहा जाता था, वे भी हमारे पुरखो "होमोसेपियं" की ही औलाद थे ,पर उनके सामाजिक व्यवहार में जो दुराचरण था और उनकी मान्यता जो की संहारक और अमानवीय थी जिसके चलते उन्हें असुर कहा जाता था !
असुर कहना याने एक पूरे के पूरे समाज के प्रति धारणा बनाती है अमानवीय और संहारिक प्रवृति की !
ऐसा नहीं था उस समाज के कुछ लोग सदाचारी नहीं थे असुरो में भी बड़े प्रकांड देवभक्त और धर्मी थे पर उस समाज ने दुनिया के सामने अपनी जो छवि बनाई थी उसकी छवि एक भयानक रूप दिखाती है, दोष उस पूरे के पूरे समाज का था क्युकी उसने कर्मो द्वारा अपना ऐसा रूप दुनिया के सामने रक्खा था !
आज इस्लाम के मानने वालो ने भी विश्व में असुरो का अनुकरण कर लिया है ,वे उत्पात की इतनी पराकाष्ठा तक पहुच चुके है की असुर्तुल्या हो चुके है अब उनमे चंद सदाचारियो का आगे आ कर कहना की नहीं हम तो शान्ति अमन के वास्तेदार है और हम दुनिया के तिरस्कार का शिकार हो रहे है!!!

वो अगर कहते है आतंकवाद वाले हमारे भाई नहीं तो ये बताओ उन्हें पनाह क्यों दे रखा है ???

क्यों जेहाद का नाम ले कर दहशत फैलाने वालो के खिलाफ पूरा का पूरा कौम खुल कर सामने नहीं आ रहा ????

क्यों जामिया के पास में जब आतंकियों से मुठभेड़ होती है तो पुलिस बल पर पत्थर फेके जाते है ??

कश्मीरियों ने अगर आतंकियों को पनाह नहीं दी होती और भारत का साथ दिया होता तो क्या आतंकवाद सर उठा सकता ???

आजादी के साठ साल बाद वो कौन नए मुसलमान आ गए और किस नए कुरआन को पढ़ कर आ गए जो उन्हें वंदेमातरम पर ऐतराज़ हो गया साठ साल तक जो गाये थे वो अब मुसलमान नहीं है क्या ???

यदि मुस्लिम कौम सच्चा सेकुलर है तो क्यों आर्टिकिल ३७० के खिलाफ आवाज़ उठा पुनः पंडित भाइयो को कश्मीर में जगह वापस नहीं देती ???

हम कब कहते है की सारे मुसलमान आतंकी है??? हम तो ये याद दिला रहे है की सारे आतंकी मुसलमान है!!!

कब कहा हमने वीर अब्दुल हामिद भारत माँ का सपूत न था ? फिर तुम कहोगे अफज़ल/कसाब को भी अपना लो ???

२६ जनवरी को सारा धर्मनिरपेक्ष देश तिरंगा फेहराता है पर मुसलमानों का कश्मीर सरकारी तौर से कहता है इस प्रक्रिया से उन्माद फैलेगा लिहाज़ा तिरंगा न फहराया जाए !!! और तुम इस देश के लोगो से कहते हो की कौम निर्दोष है और देशभक्त है जिसे वे मान लेंगे ???

जमातुल दावा ,हिजबुल मुजाहिदीन ,इंडियन मुजाहिदीन, लश्करे तैयबा इनके खिलाफ किसी उलेमा ,मौलवी या ज़मात ने कभी फतवा सुनाया है??? की इनका साथ देने वाला काफिर है कौम का दुश्मन है और अल्लाह उसे दोजक के आग नसीब करवाएगा , ये जेहाद नहीं ज़लालत है और ये अल्लाह के बन्दों का काम नहीं है ??? किसी उलेमा को जानते हो तो हमें भी बताओ ???
सबको सम्मति दे भगवान् "कहने वाले की असली आवाज में कुछ ५० मिनट से ज्यादा का संकलन मेरे पास है जिसे सुन कर मुसलमानों का तब आज़ादी के वक्त क्या विचारधारा थी समझ जायेंगे, तब भी जैसे थे (इस्लाम के नाम पर पाकिस्तान लेने के बाद ) आज भी ऐसे ही है !
हमारे जीने का मकसद चिता तक एक लंबा सुरक्षित सफ़र तय करना भर नहीं है , ये सफ़र है खुशिया बिखेरते और गम बटोरते चलते रहने का ! परिस्थितिया चाहे कोई भी हो दिल से सदा कहो ,
"भैया आल इज्ज़ वेल !!!"

HINDU JAGRAN MANCH (हिन्दू जागरण मंच): संत की शक्ति से पूर्णतः परिचित भ्रष्ट सरकार को अब ...

HINDU JAGRAN MANCH (हिन्दू जागरण मंच): संत की शक्ति से पूर्णतः परिचित भ्रष्ट सरकार को अब ...:   संत की शक्ति से पूर्णतः परिचित भ्रष्ट सरकार को अब अपनी निरंकुशता का अंत कोटि कोटि भारतीयों के ह्रदय सम्राट युग्पुरोधा स्वामी जी के हाथो...

संत की शक्ति से पूर्णतः परिचित भ्रष्ट सरकार को अब अपनी निरंकुशता का अंत कोटि कोटि भारतीयों के ह्रदय सम्राट युग्पुरोधा स्वामी जी के हाथो सुनिश्चित होता स्पष्ट रूप से दिख रहा है!

 

संत की शक्ति से पूर्णतः परिचित भ्रष्ट सरकार को अब अपनी निरंकुशता का अंत कोटि कोटि भारतीयों के ह्रदय सम्राट युग्पुरोधा स्वामी जी के हाथो सुनिश्चित होता स्पष्ट रूप से दिख रहा है!


भारत की स्वतन्त्रता से चली आ रही विडम्बना -
भारत की आज़ादी के सबसे बड़े खलनायक विन्स्टन चर्चिल का विचार था " आम जीवन में झूठ बोला जाता है , अदालत में सफ़ेद झूठ और संसद से देश की जनता से बोले जाने के लिए आकड़ो का झूठ ..." चर्चिल के दत्तक पुत्र कांग्रेस ने उनसे ये कला खूब सीखी और आज़ादी के सठिया जाने तक उन्होंने देश की जनता को इस माध्यम से खूब ठगा!
हर बार सरकार बजट और जी डी पी के माध्यम से जनता से आकड़ो का झूठ कहती रही और बजट दर बजट देश गर्त की ओर जाता रहा !
विडम्बना ये रही की इस झूठ को समझे कौन और समझाए कौन ? समझने और समझाने का सारा खेल तो पश्चात्यवाद में था और भारतीय पश्चात्यवाद के इस खेल को समझते उससे पहले कांग्रेस के सहयोग से उनका स्वाभिमान ऐतिहासिक झूठो के माध्यम से दमित कर दिया गया और उन्हें भी पश्चात्यावादी व्यवस्था का पोषक बना दिया गया !
ऐतिहासिक झूठो के उदहारण स्वरुप = अँगरेज़ कहते है की भारतीयों को सभ्यता और सामाजिक व्यवस्था में रहना उन्होंने सिखाया , जबकी सच तो ये है की जब अमेरिका और ब्रिटेन पाषाण युग में था और पत्ते लपेट कर गुफाओं में जीवनयापन करता था, तब हमारा समाज पाटलिपुत्र जैसा नगर, तक्षशिला जैसा विश्वविद्यालय और मौर्या काल में आधुनिक अर्थव्यवस्था का गठन कर चुका था ! जी हाँ ये आधुनिक राजकर व्यवस्था और मुद्रा का चलन हमने चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य काल में ही लागू कर दी थी, जिसका अनुशरण करने योग्य होने में पाश्चात्य जगत को सदियों लगे और आज भी वो उन्ही व्यवस्था का अनुशरण कर रहा है !

हम भारतीयों में कमी कहाँ है ?

कांग्रेस द्वारा आज़ाद भारत में प्रायोजित शिक्षा पद्धति और उसमे निहित मिथ्यापूर्ण इतिहास ने भारतीयों के स्वाभिमान, सदाचार और स्वाविलम्बी विचारधारा पर गहरा प्रहार किया है आज हम जाने अनजाने पाश्चात्यवाद के हितो के पोषक बन गए है, हमारे बहुत से अभिभावक ऐसा सोचते है की इस पाश्चात्यावादी व्यवस्था के सिवा हमारे बच्चो का भविष्य अंधकारमय है इस कारणवष वे अंग्रेजी को एक भाषा से कही अधिक महत्वपूर्ण स्थान दे रहे है !

अंग्रेजी शिक्षा पध्धति से भारतीय विद्यार्थियो को क्या क्षति ?
सम्पूर्ण विश्व के मनोवैज्ञानिको द्वारा विभिन्य शोधो के परिणाम को यदि आधार के रूप में देखा जाए तो मूल विचारों की अभिव्यक्ति मनुष्य मातृभाषा से बेहतर किसी भाषा में नहीं कर सकता ,क्योंकी मातृभाषा हमारे विचारो के विश्लेषण का मौलिक माध्यम है जिसके द्वारा हमारे तार्किक क्षमता का सृजन होता है ! आप स्वयं देख सकते है की विश्व के सर्वोत्तम साहित्य एवं शोध उन लेखको तथा वैज्ञानिकों द्वारा सृजन उनके मूल विचारों की अभिव्यक्ति है यानी उन्ही की मातृभाषा में लिखे गए है !
अतः शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय विद्यार्थियों पर मूल भाषा के रूप में विदेशी भाषा का थोपा जाना उनकी वैचारिक एवं विश्लेषण की क्षमता का ह्रासकारी है तथा इसके चलते उनकी विलक्षण प्रतिभा को सर्वश्रेष्ठ अभिव्यक्ति से वंचित रह जाने की मजबूरी उत्पन्न हो जाती है !

हमारी अर्थव्यवस्था पर पाश्चात्यवाद के अनुसरण के प्रतिकूल प्रभाव क्यों ?
पश्चिमी अर्थव्यवस्था का हमारे हित में होना हास्यास्पद है ! पाश्चात्य जगत का इतिहास बताता है की वे हम सहिष्णु ऋषिपुत्रो के विपरीत स्वार्थी और बर्बर विचारधारा के पोषक है जिसके चलते वे अपनी व्यावसायीक छतिपूर्ती एवं लाभप्राप्ति के लिए हमारे समस्त संसाधनों का दोहन सदा से करते आये है तथा प्रतिपल हमारी संवृद्धि को हमसे छीन कर विदेशी बैंको की सहायता से तथा विभिन्न माध्यमो से अपने देशो में ले जा रहे है !सच तो ये है की उनके द्वारा बनाई गई भ्रामक वैश्विक अर्थव्यवस्था सिर्फ उनके हितो को साधने के लिए ही बनाई गई है !
यूनियन कार्बाईट भोपाल त्रासदी का ज्वलंत उदाहरण आपके समक्ष है जहा पश्चिम के दबाव में किस प्रकार से सामूहिक नरसंहार के दोषी विदेशी हत्यारों को पहले पलायन कराया गया फिर दोषमुक्त कर दिया गया!
युगपुरुष परमपूज्य स्वामी रामदेव जी ने विदेशो में जमा भारतीयों के एक एक पैसे को देश की गरीब जनता की खुशहाली के लिए देश में वापस लाने का प्राण लिया है !

सत्तापक्ष स्वामीजी से भयभीत क्यों ?
वीरभूमि की सदा से रीत रही है की जब जब संतो ने अन्याय के खिलाफ नेतृत्व का शिक्षण एवं मार्गदर्शन किया है तब तब व्यवस्था में अमूलचूल परिवर्तन हुए है, उदाहरणार्थ रामायण कल में महर्षि जामवंत, महाभारत काल में आचार्य द्रौंण, मौर्या काल में आचार्य चाणक्य के द्वारा मार्गप्रशस्ति से ही विजयश्री की प्राप्ति संभव हो सकी !इससे शिक्षा लेते हुए स्वतंत्रता संघर्ष में महात्मा गाँधी ने सर्वप्रथम संतत्व का व्रत धारण किया तदुपरांत उनके योगदान से जगत अछूता नहीं रहा !
शहादत के बाद निरंकुश कांग्रेस ने महात्मा गाँधी की बड़ी बड़ी मूर्तिया तो बनाई पर उनके स्वदेशीवादी विचारों को भी उन्ही में चुनवा दिया, और लोकतंत्र की आढ़ में सर्वत्र लोभ्तंत्र का बोलबाला हो गया ! इससे शर्मनाक क्या हो सकता है की जीवन भर शराब एवं नशे के विरुद्ध रहने वाले संत महात्मा गाँधी के वस्तुओ की नीलामी में कांग्रेस सरकार उदासीन रही और बोली देश के एक शराब व्यवसाई ने लगाईं !
भ्रष्टतंत्र में लिप्त लोगो को ठीक तरह से ज्ञात है की यदि बैरिस्टर से स्वदेशी जागरण का व्रत धारण करने वाले संत की शक्ति इतनी प्रचंड हो सकती है की उनके समक्ष विश्वविजई ब्रितानी सरकार नतमस्तक हो जाए तो स्वदेशी जागरण के साथ बाल ब्रम्हचारी , योगी, देश को रोग एवं नशा मुक्ति एवं देश के नवनिर्माण का संकल्परत संत कितना शक्तिशाली होगा !!!
संत की शक्ति से पूर्णतः परिचित भ्रष्ट सरकार को अब अपनी निरंकुशता का अंत कोटि कोटि भारतीयों के ह्रदय सम्राट युग्पुरोधा स्वामी जी के हाथो सुनिश्चित होता स्पष्ट रूप से दिख रहा है!

देश की इन चुनौतियों का समाधान कैसे ???
ये आज के सबसे गंभीर प्रश्न है जो हर राष्ट्रवादी के विचारों में समुचित उत्तर के प्रतीक्षारत है!

यदा यदा ही धर्मष्य ग्लानिर भवति भारतः !
अभियुत्थानम अधर्मष्य तदात्मानं सृजाम्यहम !!

जब जब अधर्म और पाप का बोलबाला हुआ है ,तब तब धर्म की रक्षा के लिए परम पिता परमेश्वर ने विभिन्न अवतारों का रूप ले कर इस पावन धरा पर जनम लिया और अधर्म का नाश कर धर्म का मार्ग प्रशस्त किया है !
देश की चुनौतियों के समाधान के लिए सबसे कारगर विकल्प युगपुरुष परम श्रध्ये स्वामी रामदेव जी के मार्गदर्शन हमें प्राप्त हुआ है ! युगपुरुष परम श्रध्ये स्वामी जी ने देशवासियों के स्वाभिमान को जगाने के लिए भारत स्वाभिमान यात्रा का कठोर व्रत धारण किया है ,जिसके अंतर्गत वे संपूर्ण देशवासियों को योग के माध्यम से स्वस्थ तनमन के साथ, नशाविहीन एवं देशसेवा से ओत प्रोत जीवन जीने की अलख जगा रहे है ! उनके द्वारा विदेशी वस्तुओ के त्यागने एवं स्वदेशी अपनाने के आदेश का असंख्य जनसाधारण ने आत्मसाध कर पूरी श्रद्धा से पालन करना शुरू कर दिया है !उनके अनवरत प्रयासों से वे दिन दूर नहीं जब हम विश्व की सबसे बड़ी शक्ति बन कर पुनः विश्वगुरु के अपने आसन पर विद्यमान होंगे !


आज
समूर्ण देश में करोडो की संख्या में देश की जनता महान संत श्री अन्ना हजारे जी के साथ जनलोकपाल बिल के समर्थन में आमरण उपवास पर बैठी है , इतना बड़ा सहयोग प्राप्त होना युगपुरुष स्वामी रामदेव जी के भ्रष्टाचार के विरुद्ध किये जा रहे दीर्घकालिक एवं अनवरत जनजागरण के उपरान्त संभव हो सका है, तथा जन लोकपाल बिल को मंज़ूरी देना सरकार की मजबूरी बनती जा रही है !!

आज के युग में परम पिता परमेश्वर ने भारतवर्ष की रक्षा के लिए अवतार स्वरुप स्वामी रामदेव जी के रूप में जन्म लिया है तथा भारत का उत्थान उन्ही के करकमलो द्वारा होना सुनिश्चित है!

भारतवर्ष की चुनौतियाँ और उनके समाधान !


भारत की स्वतन्त्रता से चली आ रही विडम्बना -
भारत की आज़ादी के सबसे बड़े खलनायक विन्स्टन चर्चिल का विचार था " आम जीवन में झूठ बोला जाता है , अदालत में सफ़ेद झूठ और संसद से देश की जनता से बोले जाने के लिए आकड़ो का झूठ ..." चर्चिल के दत्तक पुत्र कांग्रेस ने उनसे ये कला खूब सीखी और आज़ादी के सठिया जाने तक उन्होंने देश की जनता को इस माध्यम से खूब ठगा!
हर बार सरकार बजट और जी डी पी के माध्यम से जनता से आकड़ो का झूठ कहती रही और बजट दर बजट देश गर्त की ओर जाता रहा !
विडम्बना ये रही की इस झूठ को समझे कौन और समझाए कौन ? समझने और समझाने का सारा खेल तो पश्चात्यवाद में था और भारतीय पश्चात्यवाद के इस खेल को समझते उससे पहले कांग्रेस के सहयोग से उनका स्वाभिमान ऐतिहासिक झूठो के माध्यम से दमित कर दिया गया और उन्हें भी पश्चात्यावादी व्यवस्था का पोषक बना दिया गया !
ऐतिहासिक झूठो के उदहारण स्वरुप = अँगरेज़ कहते है की भारतीयों को सभ्यता और सामाजिक व्यवस्था में रहना उन्होंने सिखाया , जबकी सच तो ये है की जब अमेरिका और ब्रिटेन पाषाण युग में था और पत्ते लपेट कर गुफाओं में जीवनयापन करता था, तब हमारा समाज पाटलिपुत्र जैसा नगर, तक्षशिला जैसा विश्वविद्यालय और मौर्या काल में आधुनिक अर्थव्यवस्था का गठन कर चुका था ! जी हाँ ये आधुनिक राजकर व्यवस्था और मुद्रा का चलन हमने चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य काल में ही लागू कर दी थी, जिसका अनुशरण करने योग्य होने में पाश्चात्य जगत को सदियों लगे और आज भी वो उन्ही व्यवस्था का अनुशरण कर रहा है !

हम भारतीयों में कमी कहाँ है ?

कांग्रेस द्वारा आज़ाद भारत में प्रायोजित शिक्षा पद्धति और उसमे निहित मिथ्यापूर्ण इतिहास ने भारतीयों के स्वाभिमान, सदाचार और स्वाविलम्बी विचारधारा पर गहरा प्रहार किया है आज हम जाने अनजाने पाश्चात्यवाद के हितो के पोषक बन गए है, हमारे बहुत से अभिभावक ऐसा सोचते है की इस पाश्चात्यावादी व्यवस्था के सिवा हमारे बच्चो का भविष्य अंधकारमय है इस कारणवष वे अंग्रेजी को एक भाषा से कही अधिक महत्वपूर्ण स्थान दे रहे है !

अंग्रेजी शिक्षा पध्धति से भारतीय विद्यार्थियो को क्या क्षति ?
सम्पूर्ण विश्व के मनोवैज्ञानिको द्वारा विभिन्य शोधो के परिणाम को यदि आधार के रूप में देखा जाए तो मूल विचारों की अभिव्यक्ति मनुष्य मातृभाषा से बेहतर किसी भाषा में नहीं कर सकता ,क्योंकी मातृभाषा हमारे विचारो के विश्लेषण का मौलिक माध्यम है जिसके द्वारा हमारे तार्किक क्षमता का सृजन होता है ! आप स्वयं देख सकते है की विश्व के सर्वोत्तम साहित्य एवं शोध उन लेखको तथा वैज्ञानिकों द्वारा सृजन उनके मूल विचारों की अभिव्यक्ति है यानी उन्ही की मातृभाषा में लिखे गए है !
अतः शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय विद्यार्थियों पर मूल भाषा के रूप में विदेशी भाषा का थोपा जाना उनकी वैचारिक एवं विश्लेषण की क्षमता का ह्रासकारी है तथा इसके चलते उनकी विलक्षण प्रतिभा को सर्वश्रेष्ठ अभिव्यक्ति से वंचित रह जाने की मजबूरी उत्पन्न हो जाती है !

हमारी अर्थव्यवस्था पर पाश्चात्यवाद के अनुसरण के प्रतिकूल प्रभाव क्यों ?
पश्चिमी अर्थव्यवस्था का हमारे हित में होना हास्यास्पद है ! पाश्चात्य जगत का इतिहास बताता है की वे हम सहिष्णु ऋषिपुत्रो के विपरीत स्वार्थी और बर्बर विचारधारा के पोषक है जिसके चलते वे अपनी व्यावसायीक छतिपूर्ती एवं लाभप्राप्ति के लिए हमारे समस्त संसाधनों का दोहन सदा से करते आये है तथा प्रतिपल हमारी संवृद्धि को हमसे छीन कर विदेशी बैंको की सहायता से तथा विभिन्न माध्यमो से अपने देशो में ले जा रहे है !सच तो ये है की उनके द्वारा बनाई गई भ्रामक वैश्विक अर्थव्यवस्था सिर्फ उनके हितो को साधने के लिए ही बनाई गई है !
यूनियन कार्बाईट भोपाल त्रासदी का ज्वलंत उदाहरण आपके समक्ष है जहा पश्चिम के दबाव में किस प्रकार से सामूहिक नरसंहार के दोषी विदेशी हत्यारों को पहले पलायन कराया गया फिर दोषमुक्त कर दिया गया!
युगपुरुष परमपूज्य स्वामी रामदेव जी ने विदेशो में जमा भारतीयों के एक एक पैसे को देश की गरीब जनता की खुशहाली के लिए देश में वापस लाने का प्राण लिया है !

सत्तापक्ष स्वामीजी से भयभीत क्यों ?
वीरभूमि की सदा से रीत रही है की जब जब संतो ने अन्याय के खिलाफ नेतृत्व का शिक्षण एवं मार्गदर्शन किया है तब तब व्यवस्था में अमूलचूल परिवर्तन हुए है, उदाहरणार्थ रामायण कल में महर्षि जामवंत, महाभारत काल में आचार्य द्रौंण, मौर्या काल में आचार्य चाणक्य के द्वारा मार्गप्रशस्ति से ही विजयश्री की प्राप्ति संभव हो सकी !इससे शिक्षा लेते हुए स्वतंत्रता संघर्ष में महात्मा गाँधी ने सर्वप्रथम संतत्व का व्रत धारण किया तदुपरांत उनके योगदान से जगत अछूता नहीं रहा !
शहादत के बाद निरंकुश कांग्रेस ने महात्मा गाँधी की बड़ी बड़ी मूर्तिया तो बनाई पर उनके स्वदेशीवादी विचारों को भी उन्ही में चुनवा दिया, और लोकतंत्र की आढ़ में सर्वत्र लोभ्तंत्र का बोलबाला हो गया ! इससे शर्मनाक क्या हो सकता है की जीवन भर शराब एवं नशे के विरुद्ध रहने वाले संत महात्मा गाँधी के वस्तुओ की नीलामी में कांग्रेस सरकार उदासीन रही और बोली देश के एक शराब व्यवसाई ने लगाईं !
भ्रष्टतंत्र में लिप्त लोगो को ठीक तरह से ज्ञात है की यदि बैरिस्टर से स्वदेशी जागरण का व्रत धारण करने वाले संत की शक्ति इतनी प्रचंड हो सकती है की उनके समक्ष विश्वविजई ब्रितानी सरकार नतमस्तक हो जाए तो स्वदेशी जागरण के साथ बाल ब्रम्हचारी , योगी, देश को रोग एवं नशा मुक्ति एवं देश के नवनिर्माण का संकल्परत संत कितना शक्तिशाली होगा !!!
संत की शक्ति से पूर्णतः परिचित भ्रष्ट सरकार को अब अपनी निरंकुशता का अंत कोटि कोटि भारतीयों के ह्रदय सम्राट युग्पुरोधा स्वामी जी के हाथो सुनिश्चित होता स्पष्ट रूप से दिख रहा है!

देश की इन चुनौतियों का समाधान कैसे ???
ये आज के सबसे गंभीर प्रश्न है जो हर राष्ट्रवादी के विचारों में समुचित उत्तर के प्रतीक्षारत है!

यदा यदा ही धर्मष्य ग्लानिर भवति भारतः !
अभियुत्थानम अधर्मष्य तदात्मानं सृजाम्यहम !!

जब जब अधर्म और पाप का बोलबाला हुआ है ,तब तब धर्म की रक्षा के लिए परम पिता परमेश्वर ने विभिन्न अवतारों का रूप ले कर इस पावन धरा पर जनम लिया और अधर्म का नाश कर धर्म का मार्ग प्रशस्त किया है !
देश की चुनौतियों के समाधान के लिए सबसे कारगर विकल्प युगपुरुष परम श्रध्ये स्वामी रामदेव जी के मार्गदर्शन हमें प्राप्त हुआ है ! युगपुरुष परम श्रध्ये स्वामी जी ने देशवासियों के स्वाभिमान को जगाने के लिए भारत स्वाभिमान यात्रा का कठोर व्रत धारण किया है ,जिसके अंतर्गत वे संपूर्ण देशवासियों को योग के माध्यम से स्वस्थ तनमन के साथ, नशाविहीन एवं देशसेवा से ओत प्रोत जीवन जीने की अलख जगा रहे है ! उनके द्वारा विदेशी वस्तुओ के त्यागने एवं स्वदेशी अपनाने के आदेश का असंख्य जनसाधारण ने आत्मसाध कर पूरी श्रद्धा से पालन करना शुरू कर दिया है !उनके अनवरत प्रयासों से वे दिन दूर नहीं जब हम विश्व की सबसे बड़ी शक्ति बन कर पुनः विश्वगुरु के अपने आसन पर विद्यमान होंगे !


आज
समूर्ण देश में करोडो की संख्या में देश की जनता महान संत श्री अन्ना हजारे जी के साथ जनलोकपाल बिल के समर्थन में आमरण उपवास पर बैठी है , इतना बड़ा सहयोग प्राप्त होना युगपुरुष स्वामी रामदेव जी के भ्रष्टाचार के विरुद्ध किये जा रहे दीर्घकालिक एवं अनवरत जनजागरण के उपरान्त संभव हो सका है, तथा जन लोकपाल बिल को मंज़ूरी देना सरकार की मजबूरी बनती जा रही है !!

आज के युग में परम पिता परमेश्वर ने भारतवर्ष की रक्षा के लिए अवतार स्वरुप स्वामी रामदेव जी के रूप में जन्म लिया है तथा भारत का उत्थान उन्ही के करकमलो द्वारा होना सुनिश्चित है!